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एक आशिक की दर्दभरी शायरी

Posted On: 13 Dec, 2011 Others में

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funny-loveएक आशिक की दर्दभरी शायरी

लिखे जो खत तूने वो मेरी याद में,

सारे पढ़ लिए पापा ने रात में,

सवेरा जब हुआ तो जूते पड़ गए,

वो “तेरे नाम” वाले बाल “गजनी” में बदल गए.


**********************


पत्नियां भी ना बस…

पुलिसवाला: आप तो बहुत बहादुर हैं, चोरो को आपने बहुत मारा है.

बीवी: अरे मुझे क्या पता था कि यह चोर हैं. मुझे तो लगा कि मेरे पति हैं और रात को देर से घर आकर किचन में खाना खा  रहे हैं.


**********************


पिता: फिर से फेल हो गया? पड़ोस की लड़की को देख हमेशा क्लास में फर्स्ट आती है.

बेटा: उसको देखकर ही तो मैं फेल हो गया हूं.


**********************


आदमी और औरत में फर्क

संता: आदमी और औरत में क्या फर्क है ?

बंता: देख आदमी मरने के बाद भूत बनता है पर औरत पर कोई फर्क नहीं पड़ता, वो चुड़ैल की चुड़ैल ही रहती है.



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325 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Tyya के द्वारा
June 11, 2016

An imvrissepe share, I simply given this onto a colleague who was doing somewhat analysis on this. And he actually bought me breakfast as a result of I discovered it for him.. smile. So let me reword that: Thnx for the treat! But yeah Thnkx for spending the time to discuss this, I feel strongly about it and love studying more on this topic. If possible, as you change into expertise, would you mind updating your blog with extra details? It is highly helpful for me. Large thumb up for this blog put up!

Narayan Tokade के द्वारा
November 9, 2014

एक कुत्रा रस्त्यानं सैरावैरा पळत होता. एका कुत्र्यानं त्याला अडवून विचारलं,” का, रे, का पळतोस?” ” अरे, काय सांगायच!” कुत्रा धापा टाकत म्हणाला, चांगला, म्हणून शोले पाहायला गेलो, तर तो वीरू म्हणतोय कसा….. ‘बसंती, इन कुत्तोंके सामने मत नाच!’ म्हंजे, वा रे वा! काय फुकट गेलो होतो काय…. चांगला तिकिट काढून गेलो होतो ! ‘मत नाच,’ म्हणणारा हा कोण टिक्कोजी! बसंतीनं पण त्याचं नाही ऐकलं. नाचून-नाचून तिच्या पायातून रक्त यायला लागलं, तसा तो वीरू पिसाळला; मला म्हणाला,’ कुत्ते, मै तेरा खून पी जाऊंगा!’ मी म्हणलं, अरे, हट्! तुझेच हात बांधलेले….तू क्या मेरा खून पियेगा! बसून राहिलो तसाच! पण, मधीच त्या गब्बरला काय चावलं, काय माहीत; म्हणाला,’ सांबा, उठा बंदूक, और लगा निशाना इस कुत्तेपे !’ मग मात्र म्हंटले,आता आपलं काही खरं नाही…..पळा . नया हे वह !”फोम-नारायण टकड़े.

govind के द्वारा
December 13, 2011

ही hello

सुमित के द्वारा
December 13, 2011

भैया आशिकों का तो काम ही दर्द से होता है. दर्द भरी शायरी, दर्द भरे गीते.. सबमें दर्द है जनाब


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